अंक: October 2014
 
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भारत निर्माता के प्रति
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अग्र लेख

परिवहन क्षेत्रः आर्थिक पक्ष

जगन्नाथ कश्यप 


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Articles
  शिक्षा का वित्तीय प्रबंधन
जे.बी.जी. तिलक
  शिक्षा के वित्तीय प्रबंधन की कम से कम 10-20 वर्ष की योजना को विकसित करने की आवश्यकता है, जो देश में शिक्षा के विकास की दीर्घकालीन योजना के अनुरूप हो, शिक्षा के वित्तीय प्रबंधन के युक्तियुक्त सिद्धांतों पर आधारित हो। समुचित, सक्षम
  शिक्षा में प्रौद्योगिकीः अधीर पीढ़ी की आशाएं एवं आकांक्षाएं
राजाराम एस. शर्मा
  प्रौद्योगिकी का जैसे-जैसे विकास हो रहा है, वैसे-वैसे जीवन के सभी क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता और अनिवार्यता बढ़ती जा रही है।
  एक मूल्य आधारित समाज के प्रतिः साहचर्य की शिक्षा
जे. एस. राजपूत
  ''यदि ज्ञान केवल ज्ञान ही रह जाए तो व्यक्ति के पास जीने की कोई उम्मीद नहीं रह जाती लेकिन यदि वह ज्ञान को बुद्धि में बदल दे तो न केवल वह जीवित रहेगा बल्कि उपलब्धियों की नई से नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के योग्य हो जाएगा''
  भारतीय शिक्षाःअतीत, वर्तमान और भविष्य
पवन कुमार शर्मा
  भारतीय शिक्षा के अतीत पर जब हम दृष्टिपात करते हैं तो यह समझ में आता है कि शिक्षा का दायित्व प्रायः समाज के द्वारा ही निर्वहन किया जाता था, कुछेक विषयों को छोड़कर
  जलवायु परिवर्तनः संकट में मानव स्वास्थ्य
आशुतोष कुमार सिंह
  जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर एशिया के क्षेत्रों पर पड़ेगा क्योंकि ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था कृषि व प्राकृतिक
चौराहे पर प्रसार भारती
जवाहर सरकार

प्रसार भारती की स्थापना 28 नवंबर, 1997 को उस समय हुई थी जब सरकार प्रसार भारती अधिनियम, 1990 को अंतत : लागू करने का निर्णय किया | आकाशवाणी और दूरदर्शन को सूचना और प्रसारण मंत्रालय से अलग करते हुए एक ' स्वायत्त निकाय' के अंतर्गत रखा गया | यह एक ऐतिहासिक निर्णय था जी संसद द्वारा लोक लेवा प्रसारक की स्थापना के लिए अधिनियम बनाय जाने के 7 वर्ष बाद किया गया , जिसके स्वरुप को उसके लक्ष्यों और कारणों के कथन में व्यापक स्पष्ट किया गया है :

"आकाशवाणी और दूरदर्शन को स्वाय्यात्ता प्रशन करने के लिए एक स्वायत्त निगम की स्थापना करने और उसे आकाशवाणी तथा दूरदर्शन द्वारा निष्पादित किये जाने वाले कार्य करने का प्रस्ताव किया गया ताकि निष्पक्ष, विषयपरक और रचनात्मक ढंग से काम कर सकें |

प्रस्तावित निगम नवीनता, गतिशीलता और उच्च्स्तर्रीय विश्वासनीयता एवं लचीलेपन के साथ समुचित स्वायत्त निकाय के रूप में काम करेगा | यह ऐसे लोकतांत्रिक परम्पराएं और संस्थान समृद्ध होंगे , निगम लोगों और संसद के प्रति जवाबदेह होगा , और देश की बहिरंगी परम्पराओं, भाषाओं और संस्कृतियों को ध्यान में रख कर काम करेगा | तदनुरूप प्रसार भारती ( ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया ) विधेयक संसद में पेश किया गया |"



 
 
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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