अंक: November 2009
 
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योजना के बारे में  
 
 
पृष्ठ कथा 
भारत को सबसे तेजी से उभरने वाली अर्थव्यवस्था वाले देशों में प्रमुख स्थान दिलाने में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधमों (एमएसएमई) की महती भूमिका रह....
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  उधम समूहों का विकास
  क्लस्टर सूक्ष्म, लघु, मध्यम और यहां तक कि बड़े उधमों का एक समूह होता है; जिनमें एक ही प्रकार की वस्तुओं (अथवा सेवाओं) का उत्पादन होता है और...
  विपणन की चुनौतियां और अवसर
  प्रत्येक शहर में बड़े-बड़े शाँपिंग माँल खुल रहे हैं| विश्व के कोने-कोने में रिटेल श्रृखंलाएं खुलती जा रही हैं| उभोक्ता खूब खर्च कर रहें हैं| उनकी आमदनी बढ़ रही है और इंटरनेट...
  सवाल मजदूरों के पोषण और स्वास्थ्य रक्षा का
  भूमंडलीकरण के दौर ने चीजों को काफी बदल दिया है| इसने सबसे बड़ा बदलाव आर्थिक कामकाज के पुराने वर्गीकरणों को बेमानी करने और कायदे-कानूनों को दरकिनार करने का किया है|...
  असंगठित क्षेत्र की छतरी
  यह कितनी बड़ी बिडंबना है कि देश के सकल घरेलु उत्पाद में 63 प्रतिशत का योगदान करने वाले मजदूर मौजूदा दौर में जिंदगी की आम ज़रूरतों और सहूलियतों से महरूम हैं|...
  भारत में समावेशी विकास
  समावेशी विकास संप्रग सरकार का मूल मंत्र है| कल्याणकारी सामाजिक परियोजनाओं का अधिकाधिक लाभ लाभार्थियों को मिले इसके लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय समावेशन की मुहिम छेड़ रखी है| ...
 
 
 

योजना सामाजिक-आर्थिक सरोकारों को समर्पित मासिक पत्रिका है। इसका पहला अंक प्रख्यात लेखक श्री खुशवंत सिंह ने संपादित किया था। वे इसके पहले प्रधान संपादक थे। यह पत्रिका हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली, असमिया, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और उड़िया 13 भाषओं में प्रकाशित होती है।
आर्थिक विषयों पर आधारित अनेक समाचारपत्र और पत्रिकायें इन दिनों द्याहरी पाठकों विशेष कर 'क' और 'ख' श्रेणी के बड़े शहरों के समाचार पिपासुओं की आवश्यकता की पूर्ति कर रहे हैं। छोटे शहरों तक आर्थिक पत्र-पत्रिकाओं की पहुंच सीमित है। योजना इन्हीं 'ग' और 'घ' श्रेणी के शहरों और कस्बों के सुधी पाठकों तक पहुंचने की कोशिश करती है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग भाषओं में योजना लोगों को आर्थिक मुद्दों से रू-ब-रू कराती है। हालांकि योजना एक सरकारी प्रकाशन है परंतु यह केवल सरकारी विचारों की अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है। इसकी कोशिश होती है कि जहां सराहना की आवश्यकता है, वहां सराहना की जाए और जहां आलोचना की जानी है वहां रचनात्मक दृष्टिकोण से आलोचना की जाए। योजना किसी भी विषय पर अलग-अलग मतों और विचारों को सम्मान देती है और संतुलित चित्र प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। 

 
 
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