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श्रम बाजार के अनुरूप उच्च शिक्षा |
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पहले से चले आ रहे इस अफलातूनी विचार से आज भी अनेक लोग कायल हैं कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य है व्यक्ति को समर्थ बनाना, लेकिन अब व्यावहारिक बुध्दि वाले यह मानने लगे हैं कि उच्च शिक्षा का मुख्य उद्देश्य कौशल और नवाचार के लिए योग्यताएं विकसित करना है | यह बात उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से भी देश के लिए अधिक महत्वपूर्ण है |
हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हुई है | यह जानना रोचक होगा कि निर्माण वाले चरण को लाघंते हुए देश ने गैर-परंपरागत मार्ग से विकास तक पहुंचने का रास्ता चुना और अब सेवा क्षेत्र में पहुंच चुका है | इसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में स्नातकों की मांग बढ गई है जिससे उच्च शिक्षा क्षेत्र भी भौचक रह गया | वह इस मांग को पूरा करने में असमर्थ था | अत: उच्च शिक्षा की जमकर किरकिरी हुई | यह भी एक विरोधाभासी सच है कि जहां एक ओर कमी पूरी नहीं हो पा रही है, वहीं स्नातकों की बेरोजगारी बढ रही है |
कार्य की प्रकृति बदलते रहने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रम बाजार के एकीकरण के कारण उच्च शिक्षा और श्रम बाजार में तालमेल कठिन हो गया है | इस लेख में श्रम बाजार और उच्च शिक्षा की हाल की घटनाओं पर नजर डाली गई और दोनों क्षेत्रों में समन्वय के सुझाव दिए गए हैं |
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जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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