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विश्वविधालय और समाज के बीच संवाद आवश्यक |
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यदि आप एक छात्र हैं, शिक्षक हैं या शोधार्थी हैं और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की खामियों से नाखुश हैं, आपको कालेज और विश्वविधालय में नियम-कानूनों में बाधंकर, विषयों के पिजंडो, में कैद कर दिया गया है, लेकिन आप सृजनात्मकता के पंख लगाकर अपने अध्ययन और शोध की गहराइयों में गोते लगाना चाहते हैं तो अब आपके सामने उम्मीद की नयी किरणें है | ऐसी शिक्षा की उम्मीदें जहां न कोई दीवार होगी, न बेडियां होंगी, आप जिस दिशा मिल सकेगी | कुछ ऐसी ही उत्साहजनक सिफारिशों के साथ उच्च शिक्षा पर गठित यश पाल रिपोर्ट हाल में जारी की गई | केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने रिपोर्ट की महत्वपूर्ण सिफारिशों को 100 दिनों के भीतर लागू करने की घोषणा की गई, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा समुदाय में हलचल मच गई | इससे पूर्व सैम पित्रोदा की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय ज्ञान आयोग रिपोर्ट भी पर कुछ हलचल हुई थी, लेकिन यश पाल कमेटी रिपार्ट का भविष्य उज्जवल नजर आ रहा है क्योंकि इस रिपोर्ट में शिक्षा को आर्थिक औजार के स्थान पर मानवता से जोडा गया है और देश में उच्च शिक्षा के विभिन्न आयामों को एक मंच पर लाकर समाज से सीधे संवाद स्थापित करने की सिफारिश की गई है | स्थानिय मुद्दों, दस्तकारों के कला-कौशल और सामाजिक पहलुओं को विश्वविधालयों के अंदर लाने की बात की गई है |
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन |
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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