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| भारत को सबसे तेजी से उभरने वाली अर्थव्यवस्था वाले देशों में प्रमुख स्थान दिलाने में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधमों (एमएसएमई) की महती भूमिका रह.... |
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अग्र लेख
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधमों का वित्तपोषण मुद्दे एवं चिंतायें
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधम औधोगीकरण, रोजगार सृजन, निर्यात वृध्दि और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने की प्रक्रिया में अपने उल्लेखनीय योगदान के कारण प्राय: सभी अर्थव्वस्थाओं......
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उधम समूहों का विकास |
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क्लस्टर सूक्ष्म, लघु, मध्यम और यहां तक कि बड़े उधमों का एक समूह होता है; जिनमें एक ही प्रकार की वस्तुओं (अथवा सेवाओं) का उत्पादन होता है और...
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विपणन की चुनौतियां और अवसर |
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प्रत्येक शहर में बड़े-बड़े शाँपिंग माँल खुल रहे हैं| विश्व के कोने-कोने में रिटेल श्रृखंलाएं खुलती जा रही हैं| उभोक्ता खूब खर्च कर रहें हैं| उनकी आमदनी बढ़ रही है और इंटरनेट...
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सवाल मजदूरों के पोषण और स्वास्थ्य रक्षा का |
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भूमंडलीकरण के दौर ने चीजों को काफी बदल दिया है| इसने सबसे बड़ा बदलाव आर्थिक कामकाज के पुराने वर्गीकरणों को बेमानी करने और कायदे-कानूनों को दरकिनार करने का किया है|...
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असंगठित क्षेत्र की छतरी |
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यह कितनी बड़ी बिडंबना है कि देश के सकल घरेलु उत्पाद में 63 प्रतिशत का योगदान करने वाले मजदूर मौजूदा दौर में जिंदगी की आम ज़रूरतों और सहूलियतों से महरूम हैं|...
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भारत में समावेशी विकास |
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समावेशी विकास संप्रग सरकार का मूल मंत्र है| कल्याणकारी सामाजिक परियोजनाओं का अधिकाधिक लाभ लाभार्थियों को मिले इसके लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय समावेशन की मुहिम छेड़ रखी है| ...
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ज्ञानवान समाज के निर्माण की जरूरत |
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भारत जैसे-जैसे विकास और प्रगति के रोमांचकारी नये भविष्य की ओर बढ रहा है, सतत विकास का एजंङा गढने में ज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण होती जाएगी | ज्ञानवान समाज के निमार्ण की धारणा अब कोई विमर्शनीय विलासिता नहीं रह गई है, इसके महत्व को विश्वभर के नीति-नियामक अब भलीभांति स्वीकार कर चुके हैं | भारत में यह विचार, देश के समक्ष चुनौतियों के कारण और भी महत्वपूर्ण बन गया है | हमारी जनसंख्या के 55 करोङ लोगों का 25 वर्ष से कम आयु का होना एक बहुत बडा जनसंख्यात्मक लाभांश है, क्योंकि यह एक विशाल मानव संसाधन है | मानव संसाधन की इस अतुलनीय निधि की शिक्षा और कौशल विकास एजेंडा पर जोर देते हुए उसे सलीके से साधने की जरूरत है ताकि वह 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना कर सके | देश में आज जो विशाल असमानता दिखाई दे रही है वह ज्ञान प्राप्ति के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण है | उसके निराकरण के लिये हमें शिक्षा के अवसरों में पर्याप्त वृध्दि करनी होगी, एक ऐसी समावेशी शिक्षा प्रणाली लानी होगी कि कोई भी इसकी परिधि से बाहर नहीं रह सके | अंतत: देश के विकास को गति देने के लिए एक ऐसी शिक्षा प्रणाली के गठन की आवश्यकता है जो नवाचार एवं उधमिता को बढावा दे सके और बढती अर्थव्यवस्था की कौशल आवश्यकताओं को पूरा सके |
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