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| उदारीकरण का युग शुरू होने के पूर्व भारत .... |
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अग्र लेख
मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा
अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही .....
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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सवाल मजदूरों के पोषण और स्वास्थ्य रक्षा का |
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भूमंडलीकरण के दौर ने चीजों को काफी बदल दिया है| इसने सबसे बड़ा बदलाव आर्थिक कामकाज के पुराने वर्गीकरणों को बेमानी करने और कायदे-कानूनों को दरकिनार करने का किया है| इसमें कौन उधोग सरंक्षित सूची में है कौन खुली सूची में, किसे लघु और सूक्ष्म बताया जाए और किसे बड़ा, यह वर्गीकरण धूमिल हो चुका है| लघु और सूक्ष्म उधोगों के लिए आरक्षित सूची छोटी होती-होती समाप्ति पर है, तो अब श्रम कानून और बाकी कायदों को लागू करना-कराना प्राथमिकता से हट गया लगता है| असंगठित और कमजोर हैसियत का होने के कारण छोटे उधोगों की आवाज भी दिनोंदिन गुम होती जा रही है| संभव है इनमें से काफी का कामकाज बड़ा हो गया होगा, पर मैदान में नये आने वाले उसमें ज्यादा ही होंगें|
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