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भारत में नियोजित विकास के युग की शुरूआत के साथ ही सिंचाई की बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होता आ रहा है | परंतु इस विस्तार की गति किंचित अस्थिर रही है |
पहली कुछ पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान कृषि उत्पादन मे वृध्दि के साधन के तौर पर सिंचाई को बढावा देने पर जो जोर दिया जा रहा था, वह धीरे-धीरे धीमा पड गया, विशेषकर तब जब अपर्याप्त अनाज की चिंताएं दूर हो चली थीं |
सिंचाई के लिए राज्यों के वार्षिक बजटीय आवंटन या तो कम होते गए या, कुछ मामलों में वास्तविक मुल्यानुसार ठहर से गए थे | नतीजा यह हुआ कि सिंचाई के बुनियादी ढांचे में विकास की दर कम हो गई | इस प्रवृत्ति को अब उलटने का प्रयास किया जा रहा है | |