सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधम औधोगीकरण, रोजगार सृजन, निर्यात वृध्दि और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने की प्रक्रिया में अपने उल्लेखनीय योगदान के कारण प्राय: सभी अर्थव्वस्थाओं में नीति-निर्माताओं की पसंद बने हुए हैं| इन उधोगो के समर्थन के लिए देशभर में चल रहे कार्यो को नज़दीक से देखने से पता चलता है कि इस क्षेत्र के विकास के प्रयास दो बुनियादी सिध्दांतों पर आधारित हैं-
(i) सूक्ष्म, लघु एंव मझोले उधोग (एमएसएमई) विकास को आगे बढ़ाने वाले इंजन हैं, और
(ii) बाजार की खामियों से उनका विकास प्रभावित होता है| इसलिए इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकारी समर्थन अनिवार्य और उचित है| जहां तक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इन उधमों (एमएसएमई) के योगदान का संबंध है, देशव्यापी (एमएसएमई) के योगदान का संबंध है, देशव्यापी आंकडों से पता चलता है कि निर्धन देशों में एक प्रकार से ये ही उभर रहे निजी क्षेत्र हैं और इस प्रकार निजी क्षेत्र नीति-विकास की नींव बन गए हैं (हाँलबर्ग, 2001)| विनिमार्ण क्षेत्र में एमएसएमई का हिस्सा (250 कर्मचारियों को रोजगार देने वाले) ग्रीस में लगभग 85 प्रतिशत है, जबकि इटली में 80 प्रतिशत, ब्राज़ील में 60 प्रतिशत और मेक्किसको में 50 प्रतिशत के आसपास हैं (स्रोत-अय्यागरी, बेक और डेमिरगुक-कंट-2003)| अनेक देशों में विनिमार्ण क्षेत्र में रोजगार में लगे कुल लोगों में से लगभग 60 प्रतिशत एसएमई (लघु और मध्यम श्रेणी) के उधोगों में काम करते हैं|
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