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बिजली देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अति आवश्यक मूल सुविधा है | किसी भी देश में प्रतिव्यक्ति औसत बिजली आपूर्ति उस देश के आर्थिक विकास स्तर का सूचक होती है |
भारत मे पिछले वर्षो में हालांकि बिजली आपूर्ति बढी है | 1947 में यह प्रतिव्यक्ति औसतन 16 युनिट थी जो 2006-07 में 655 युनिट हो गई, फिर भी अभी यह अनेक विकसित और विकासशील देशों के मुकाबले विश्व औसत की 1/4 और ओईसीडी देशों की 1/14 तथा चीन की तुलना में 1/3 है |
भारत में बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 1947 में 1362 मे.वा. के मुकाबले मार्च 2009 में 1,47,965 मे.वा. हो गई है जो चक्रवृध्दि दर पर 8 प्रतिशत की वृध्दिदर का सूचक है | लेकिन यह वृध्दि देश में बढती मांग को पूरी करने में असफल रही, क्योंकि अत्यधिक मांग वाली अवधि 2008-09 में 12 प्रतिशत और ऊर्जा की कमी 11 प्रतिशत बनी हुई है | |