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इस साल के आम बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को कोई खास राहत नहीं है फिर भी वर्ष 2009-10 के स्वास्थ्य बजट में कोई 4,000 करोङ रूपये की वृध्दि की गई है| आकंङो में देश का स्वास्थ्य बजट 21,113.30 करोङ रूपये का तो हो गया है, लेकिन इसमें नियमित टीकाकरण, प्रजनन एंव शिशु स्वास्थ्य जीवाणु जनित बीमारी रोकथाम तथा स्वास्थ्य बीमा जैसे मदों में कटौती कर आम लोगों तथा जनस्वास्थ्य के ढाचें को कमजोर करने की कोशिश की गई है| हालंकि सरकार ने रार्ष्टीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के बजट में 2,057 करोङ की बढोतरी कर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मजबूत बनाने का सकेंत दिया है|
वर्तमान बजट में सरकार ने बढते मरीजों और जनसंख्या के दबाव को नजरअदांज करते हुए जनस्वास्थ्य की विभिन्न योजनाओं पर होने वाले खर्च में कटौती की है| जाहिर है इससे पहले से ही जर्जर स्वास्थ्य सेवा पर ज्यादा बुरा असर पङेगा| शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार ने नियमित टीकाकरण योजना शुरू की थी| कई दशक पहले शुरू की गई इस योजना के लगातार चलने के बाद भी अभी तक देश की पूरी आबादी को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है| स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकङों के ही अनुसार बीसीजी का टीका देश के 87 फीसदी बच्चों की सख्यां महज 71 फीसदी है| ङीपीटी का तो मात्र 68.4 फीसदी बच्चों को ही लग पाया है| पोलियो उन्मूलन की पूरी कोशिश के बावजूद मात्र 67.5 फीसदी बच्चे ही पोलियों की बजाव खुराक ले पाए हैं| |