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मंदी के दौर में नौकरियों का जुगाङ |
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संभवत: स्वतत्रंता के बाद किसी वित्तमंत्री को बजट तैयार करते समय उन चुनौतियों का सामना नहीं करना पङा होगा, जिनका सामना वर्तमान वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी को करना पङा है| उन्हें एक ओर विश्वव्यापी मंदी से प्रभावित उधोगों को राहत देनी थी और दूसरी ओर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आवश्वक उपाए करने थे| विश्वव्यापी मंदी के प्रभाव से हमारी अर्थव्यस्था को जबरदस्त आघात लगा| विदेश व्यापार में जबरदस्त गिरावट आई| निर्यात घटने के साथ हमारा आयात भी घटा है| इससे उघोग क्षेत्र में गिरावट का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है|
विश्वव्यापी मंदी से सबसे अधिक नुकसान देश के निर्यात क्षेत्र को हुआ| उसके विदेशी ग्राहकों ने न केवल माल के आङर रद्द कर दिए बल्कि कुछ ने आपूर्ति किए गए माल का भुगतान भी रोक लिया| इससे ये निर्यातक दोहरे संकट में फंस गए| मंदी के कारण सभी तरह का कपङा उधोग, सिले-सिलाए वस्त्र, रत्न और आभूषण, चमङे का सामना, हस्तशिल्प का सामना, कालीन, समुद्री उत्पाद, पर्यटन, खनिज एवं इजींनियरिंग उत्पाद और छोटे एवं लघु उधोग क्षेत्र के उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ| गैर-सरकारी सूत्रों के अनुसार मंदी के कारण लगभग 30 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं| इनमें से कुछ को दूसरी जगह काम मिल गया लेकिन अधिकांश आज भी बेरोजगार है| सरकारी सूत्रों ने 5 लाख लोगों के बेरोजगार होने की आशंका व्यक्त की है| हालंकि इस विषय में प्रामाणिक आकंङे उपलब्ध नहीं हैं| अनुमान अतिरजिंत हो सकते हैं लेकिन इसमें कोई सदेंह नहीं कि अर्थव्यवस्था के लिए संकट गहरा और गंभीर था| |
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन |
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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