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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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भूकंपरोधी भवन : समस्याएं और सुझाव |
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हाल के वर्षो में अनेक भूकंपों के कारण भारत में हजारों लोग मारे गए और भारी आर्थिक हानि हुई है| तुलनात्मक रूप से उसी तीव्रता के भूकंपों से अमरीका में 100 से भी कम मौतें होती हैं| इसका प्रमुख कारण है, सुरक्षित भवनों के निर्माण के लिए किए गए व्यवस्थित प्रयास| भारत में आए प्रत्येक विध्वंसकारी भूकंप की और मीडिया का ध्यान आकर्षित होना सहज ही है| सरकारी एजेंसियां भविष्य में इस तरह की आपदाओं को कम करने की योजनाओं की घोषणा करती हैं, समाचारपत्रों और टीवी चैनलों दवारा विशेषज्ञों की भेंटवार्ता प्रसारित की ज्ञाती हैं, देशभर में सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है और लोगों को भरोसा होने लगता है कि भूकंप की समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं| परंतु तभी अगला भूकंप आता है और लोग महसूस करते हैं कि पिछली घटना के समय जो स्थिति थी वही अब भी है, कोई सुधार नहीं हुआ है| तो क्या इसका अर्थ है कि यह एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान भारत अकेले नहीं कर सकता है? उत्तर है हम इस समस्या का निराकरण कर सकते हैं, परंतु उसके लिए दृढ इच्छाशत्कि की आवश्यकता है| प्रस्तुत आलेख में निहित समस्याओं का पता लगाने और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई है|
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