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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
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भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
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किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
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कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
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योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
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योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
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योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
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योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
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आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
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समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन |
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पिछले वर्षो के दौरान एशियाई उपमहादीप में हर प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं आती रही हैं| अनेक अध्ययनों, अनुसंधानों और आंकडो से पता चलता है कि पिछले 15 वर्षो की अवधी में एशियाई देशों को अनेक आपदाओं का सामना करना पडा| आंकडो के हिसाब से देखा जाए तो यहां के हर 10 लाख लोगों पीछे (1991 से 2005 के बीच) 57,342 (यूएनआई एसडीआर) लोगों को ये विपत्तियां झेलनी पडीं| जिन आपदाओं का व्यापक असर रहा, उनमें जल और मौसम से संबंधित, भौगोलिक एवं जैविक किस्म की विपत्तियां शामिल हैं| इनके कारण 577.44 अरब अमरीकी डाँलर के बराबर आर्थिक हानि हुई| जो देश इनसे प्रभावित हुए उनमें विकसित और विकासशील दोनों तरह के राष्ट्र आते हैं| इन देशों में आपदा पीडित होने की संभावना और खतरा अधिक है| इनमें कई देश ऐसे हैं जहां के लोग भोजन, वस्त्र और मकान का भी मुश्किल से जुगाड कर पाते हैं| इनके आपदाग्रस्त होने की संभावना भौगोलिक- राजनीतिक कारणौं से भी अधिक है|
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नियमित
लेख |
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन |
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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