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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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विकास से जोखिम रहित विकास तक |
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आपदाओं के प्रभाव को काफी लंबे अरसे से विकास प्रक्रिया में बाधक माना ज्ञाता रहा हे| पिछले दो दशकों से आपदाओं ने एशियाभर में अनेक देशों को, और खासतौर से भारत को प्रभावित किया है| गत वर्षो में आपदाओं के कारण लाखों लोगों के प्राण गए और बहुमूल्य बुनियादि सुविधाएं बर्बाद हुई|
आपदाओं का सामना करते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, सडकें, संचार, बिजली और सिचाई की मूल सुविधाएं नष्ट हुई|
आपदाओं के कारण राष्ट्रों की विकास प्रक्रिया प्रभावित होती है और आपदा बाद उन्हें फिर से वहीं से विकास कार्य कार्य शुरु करने होते हैं जहां से उन्होंने पहले शुरू किया था| उन्हें विकास कोष पुनर्निर्माण पर लगाने पडते हैं| देश को फिर से 'पटरी पर लाने' के उदेश्य से अतिरिक्त सहायता राशी जुटानी पडती है|
आपदाओं के कारण जन-धन की हानी नहीं होती बल्कि औध्योगिक उत्पादन भी प्रभावित होता है और उपयोगी सेवाओं- परिवहन, श्रम आपूर्ति और बाजार में बाधा आती है| जीवन की हानी होता है| विकास योजानाएं प्रभावित होती हैं और प्रगति रूक जाती है|
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