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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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आपदा प्रबंधन: आवश्यकता एवं पुनर्मूल्यांकन |
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जल, सिंचाई और बाढ संबंधी मुदृदौं पर काम करने वाले अनेक विभागों ने हाल ही में अपने नाम बदल लिए हैं|
अब सिंचाई विभाग जल संसाधन विभाग बन गया है, बाढ नियंत्रण ने बाढ प्रबंधन नाम धारण कर लिया है और राहत एवं पुनर्वास विभाग ने आपदा प्रबंधन विभाग का चोला पहन लिया है| नाम परिवर्तित देखकर ऐसा जान पडता है मानो इन विभागों की कार्यशैली बहुत सुधर गई हो|
लेकिन अगर कोई पूछे कि उनकी कार्यशैली में क्या बदलाव आया है तो इसका शायद ही कोई समुचित उत्तर मिल पाए| ये अधिकांश विभाग अब भी वही काम कर रहे है|
बाढ नियंत्रण वाले अब भी तटबंध बनाते हैं और आपदा प्रबंधन विभाग उसी प्रकार राहत कार्य करता है| अगर नाम बदलने से कार्यशैली बदल जाती तो फिर और कुछ करने की क्या जरूरत पडती?
मानव जीवन को प्रभावित करने वाली सभी चीजों के बारे में यह बात सच है लेकिन जनजीवन को मुश्किलों से सराबोर करने वाली आपदा बाढ के बारे में ज्यादा सच है|
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