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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक... |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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ऊर्जा जीवन है, इसे बचाएं |
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भारत सरकार देश की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था की बढ़ती जा रही ऊर्जा आवश्यकताएं वाजिब दरों पर पूरी करने को प्रतिबद्ध है। आर्थिक विकास की जो संकल्पना की गई है, उसके अनुरूप ही ऊर्जा उपलब्धता भी जरूरी है। इसीलिए विद्युत उत्पादन क्षमता बड़ाई जा रही है और स्वच्छ साधनों से ऊर्जा प्राप्त करने को बहुत महत्व दिया जा रहा है, वहीं ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा के कुशल प्रयोग को भी आज की जरूरत माना गया है। इस दिशा के प्रयत्नों को ऊर्जा नीति में बहतु महत्व दिया जा रहा है। सरकार इसे कितना महत्व दे रही है, यह बात इसी से स्पष्ट है कि उसने भारतीय अर्थव्यवस्था को कम ऊर्जा-गहन बनाने के उद्देश्य से ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 बनाया है और इस अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए एक ऊर्जा कुशलता ब्यूरो की स्थापना 1 मार्च, 2002 को विद्युत मंत्रालय के अधीन की गई है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (2001 का 52) इस काननू में उर्जा संरक्षण और इसके कुशल उपयोग की मंशा और वचनबद्धता को विधिक स्वरूप दिया गया है। इस कानून के जरिये केंद्र सरकार और कुछ हद तक राज्य सरकारों को भी निम्नलिखित कदम उठाने के अधिकार दे दिए गए हैं : ऊर्जा गहन उद्योगों, अन्य प्रतिष्ठानों और व्यापारिक भवनों को लक्षित उपभोक्ता के रूप में अधिसूचित करना। लक्षित उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा संरक्षण के मापदंड एवं मानक तय करना। लक्षित उपभोक्ताओं को प्रमाणित ऊर्जा प्रबंधक नामित करने, किसी प्रत्यायित/मान्यताप्राप्त ऊर्जा लेखा परीक्षक से तय अंतराल पर निर्द्दारित तरीक़े से ऊर्जा लेखा परीक्षा कराने, ऊर्जा खपत पर जानकारी देने और लेखा परीक्षक एजेंसी की सिफ़ारिशों पर की गई कार्रवाई की सूचना देने, ऊर्जा खपत मापदंडों का परिपालन करने तथा ऊर्जा खपत के कुशल नियम बनाने और लागू करने संबंधी निर्देश जारी करना। |
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