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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक... |
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अग्र लेख
भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान जी. श्रीनिवासन
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अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
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भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
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किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
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कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
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योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
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योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
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योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
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योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
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आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
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सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा |
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संसद में पेश होने वाले बजट पर समाज के हर वर्ग की उम्मीद टंगी होती है। इस बार भी बाजार, कमोडिटी, खुदरा क्षेत्र से लेकर शिक्षा जगत को भी आशा थी कि कुछ बेहतर मिलने वाला है। भारत को भी वैष्विक आर्थिक संकट के झटके सहने पड़े हैं। अंतरिम बजट से सब को कुछ मिला है। कुछ को पर्याप्त तो कुछ को उम्मीद से कम। शिक्षा क्षेत्र पर नजर दौडाएं तो इस बजट में 7,478.60 करोड़ रुपये मिले हैं। अगर शिक्षा की अलग-अलग इकाइयों की बात करें तो स्कूली शिक्षा के लिए 28,799 करोड़ रुपये मिले तो वहीं उच्च शिक्षा के लिए 13,179 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 15 नये केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की घोषणा भी की गई है। कुछ और भारतीय प्रबंधन संस्थान के साथ भारतीय प्रौधोगिकी संस्थानों की स्थापना का लक्ष्य भी इस बजट में शामिल है। देश के सामने 2010 दूर नहीं है जब 6-14 आयु वर्ग के तमाम बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने अंतरिम बजट भाषण में कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं की जाएगी। शिक्षा की परिधि में उन तमाम बच्चों को शामिल करने के लिए सरकारी स्तर पर कई योजनाएं कायर्क्रम चलाए जा रहे हैं। उनमें से एक सर्व शिक्षा अभियान भी है। सर्व शिक्षा अभियान की शुरू आत 2000-01 में इस उद्देश्य से की गई थी कि देश के 6-14 वर्ष तक की आयुवर्ग के सभी बच्चों को 2010 तक निशुल्क और गुणवत्तापरक प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध हो जाएगी। जबकि यूनेस्को ने तो इसके लिए सन् 2015 तक की सीमा निर्धारित की है। लेकिन भारत ने सर्वशिक्षा अभियान के तहत वर्ग 2010 तक इस उद्देश्य को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। तभी 2009-10 वित्तीय वर्ग का अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने इस तथ्य पर ख़ास जोर दिया कि सर्व शिक्षा अभियान ने सबको प्रारंभिक षिक्षा सुलभ कराने का लक्ष्य रखा है। इसलिए इस वर्ष 2009-10 में इस मद पर 13,100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। अपने अभिभाषण में वित्तमंत्री ने स्वीकार किया कि लगभग 98 फीसदी बस्तियों में प्राथमिक विद्यालय खलु गए हैं और अब प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधर करने की आवश्यकता है।
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन |
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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