अंक: August 2010
 
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पृष्ठ कथा
पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक...
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अग्र लेख

जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण

राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश .........

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सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

संसद में पेश होने वाले बजट पर समाज के हर वर्ग की उम्मीद टंगी होती है। इस बार भी बाजार, कमोडिटी, खुदरा क्षेत्र से लेकर शिक्षा जगत को भी आशा थी कि कुछ बेहतर मिलने वाला है। भारत को भी वैष्विक आर्थिक संकट के झटके सहने पड़े हैं। अंतरिम बजट से सब को कुछ मिला है। कुछ को पर्याप्त तो कुछ को उम्मीद से कम। शिक्षा क्षेत्र पर नजर दौडाएं तो इस बजट में 7,478.60 करोड़ रुपये मिले हैं। अगर शिक्षा की अलग-अलग इकाइयों की बात करें तो स्कूली शिक्षा के लिए 28,799 करोड़ रुपये मिले तो वहीं उच्च शिक्षा के लिए 13,179 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 15 नये केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की घोषणा भी की गई है। कुछ और भारतीय प्रबंधन संस्थान के साथ भारतीय प्रौधोगिकी संस्थानों की स्थापना का लक्ष्य भी इस बजट में शामिल है। देश के सामने 2010 दूर नहीं है जब 6-14 आयु वर्ग के तमाम बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने अंतरिम बजट भाषण में कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं की जाएगी।
शिक्षा की परिधि में उन तमाम बच्चों को शामिल करने के लिए सरकारी स्तर पर कई योजनाएं कायर्क्रम चलाए जा रहे हैं। उनमें से एक सर्व शिक्षा अभियान भी है। सर्व शिक्षा अभियान की शुरू आत 2000-01 में इस उद्देश्य से की गई थी कि देश के 6-14 वर्ष तक की आयुवर्ग के सभी बच्चों को 2010 तक निशुल्क और गुणवत्तापरक प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध हो जाएगी। जबकि यूनेस्को ने तो इसके लिए सन्‌ 2015 तक की सीमा निर्धारित की है। लेकिन भारत ने सर्वशिक्षा अभियान के तहत वर्ग 2010 तक इस उद्देश्य को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। तभी 2009-10 वित्तीय वर्ग का अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने इस तथ्य पर ख़ास जोर दिया कि सर्व शिक्षा अभियान ने सबको प्रारंभिक षिक्षा सुलभ कराने का लक्ष्य रखा है। इसलिए इस वर्ष 2009-10 में इस मद पर 13,100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। अपने अभिभाषण में वित्तमंत्री ने स्वीकार किया कि लगभग 98 फीसदी बस्तियों में प्राथमिक विद्यालय खलु गए हैं और अब प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधर करने की आवश्यकता है।

 
 
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