अंक: August 2010
 
Home     
DETAIL STORY  
 
 
पृष्ठ कथा
पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक...
     read more...
अग्र लेख

जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण

राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश .........

read more...
Articles
  मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न
कमल नयन काबरा
  अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
  नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती
शशांक भिङे
  मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
  भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण
मानस भट्टाचार्य
  भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
  मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति
के.आर.सुदामन
  मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
  मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे
  भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
दरवाजे पर पहुंचा बजट लाभ

सरकार की बजट भाषा में सामाजिक क्षेत्र की चर्चा 2009-2010 के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री ने की। वित्तमंत्री ने इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदायों, अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी, सफ़ाई कर्मचारी, कम उम्र की विधवाओं, विकलांगों, असगंठित क्षेत्र में ग़रीबी रेखा से नीचे के लोगों बुजुर्गों के पेंशन आदि के बारे में चर्चा की है।
लेकिन आम बोल-चाल की भाषा में सामाजिक क्षेत्र यहीं तक सीमित नहीं है। सामाजिक क्षेत्र में जाति, धार्मिक, लिंग आधारित वर्ग आते हैं जिनमें दलित, पिछड़े वर्ग, आदिवासी, अल्पसंख्यक और महिलाओं का समुदाय होता है। किसी बजट को देखने का एक यह भी नजरिया है।
हालांकि यह अंतरिम बजट है फिर भी सामाजिक वर्गों के लिए बजट में प्रावधान सीधे नहीं होते हैं बल्कि विभिन्न कार्यकर्मों के जरिये उन वर्गों तक बजट प्रावधानों का लाभ कितना पहुँच पाएगा, इस दृष्टि से बजट का विश्लेषण किया जाता है। जैसे सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, सर्वशिक्षा अभियान, स्कूलों में दोपहर के भोजन, राजीव गांधी ग्रामीण पेयजल मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन आदि मदों में राशि बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसी तरह कृषि के क्षेत्र में सरकार ने दावा किया है कि कृषि के लिए 2003-04 की तुलना में 2008-09 की अवधि के बीच में आयोजन आवंटन तीन सौ प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।
इसमें 3.6 करोड़  किसानों को पैंसठ हजार तीन सौ करोड़ रुपये कर्ज माफ़ी या कर्ज राहत मिलने का दावा किया गया है।
सरकार द्वारा सामाजिक वर्गों के हितों के लिए बजटों में जितने प्रावधान किए जाते हैं उनमें दो बातें जुडी होती हैं। पहली बात तो यह कि नीति के स्तर पर सरकार का क्या रुख है।

 
 
Regional Languages
Regional Languages
Hindi
English
Assamese
Bengali
Gujarati
Kannada
Malayalam
Marathi
Oriya
Punjabi
Tamil
Telugu
Urdu
खबरें और झलकियाँ
नियमित लेख
झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का  घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
Copyright © 2008 All rights reserved with Yojana Home  |  Disclaimer  |  Contact