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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक... |
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अग्र लेख
भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान जी. श्रीनिवासन
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अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
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भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
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किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
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कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
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योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
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योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
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योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
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योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
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आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
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उपभोक्ता अपना अधिकार जानें |
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एक स्वतत्रं अर्थव्यवस्था में देश का प्रत्येक नागरिक उपभोक्ता होता है, चाहे वह एक छोटा बच्चा ही क्यों न हो यहां तक कि एक वस्तु का उत्पादक, वितरक तथा विक्रेता भी किसी न किसी प्रकार से उपभोक्ता की श्रेणी में आता है। व्यवसाय में उपभोक्ता का स्थान सर्वोपरि होता है। अर्थशास्त्र के उपभोक्ता 'सार्वभौमिकता' व 'ग्राहक जो चाहे उसे मिले' जैसे सिद्धांत के अनुसार, उपभोक्ता व्यवसाय का राजा होता है और उसी की इच्छानुसार सारे उत्पादों एवं सेवाओं का उत्पादन एवं विपणन होता है। ये सिद्धांत व्यवसाय का मार्गदर्शन तो करते हैं, किंतु ये मात्र सेद्वान्तिक पक्ष हैं। व्यवहार में यह स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है कि अभी भी विकसित अर्थव्यवस्थाओं तक में उपभोक्ता का वह स्थान नहीं है, जो उसे प्राप्त होना चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्थाओं में ग्राहक की स्थिति तो और भी शोचनीय है। उपभोक्ता सदेव व्यवसायियों द्वारा अनुचित लाभ कमाने के उद्देश्य से ठगे जाते रहे हैं। समाज में बहुधा एसे लोग मिल जाते हैं जो यह शिकायत करते हैं कि उन्हें अमुक व्यक्ति ने ठग लिया या अमुक व्यक्ति की धोखाधडी के वे शिकार हो गए, क्रय किया गया माल बतलाए गए गुणों के बिलकुल विपरीत है, लेकिन अब क्या हो सकता है शायद यही हमारी किस्मत में लिखा था। लोग ठगे जाते रहते हैं और उसका रोना रोते रहते हैं। यह स्थिति क्यों आती है और समाज में धोखाधडी और ठगी क्यों चलती रहती है? इसका एकमात्र कारण यही है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती और उनमें शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने की जागरुकता का अभाव होता है। |
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन |
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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