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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक... |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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राजनीति का अपराधीकरण |
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यह निर्विवाद तथ्य है कि भारत दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक राष्ट्रों में इसे सबसे स्थिर लोकतंत्रों में शुमार किया जाता है। लक्ष्मी चरण सेन और अन्य बनाम ए. के.एम. हसनुज्जमां और अन्य (एआईआर 1985 एस.सी. 1233) के मामले में उच्चतम न्यायालय के कथनानुसार, ''भारत तो लोकतंत्र का नखलिस्तान है, समसामयिक इतिहास की सच्चाई।'' यह बात तब और अधिक सच लगती है विशषेकर जब हम अपने उन पडोसी देशों की और देखते हैं जिन्हानें कमोबेश भारत की स्वतंत्रता के आसपास ही आजादी पाई। बावजूद इसके क्या हम दावे से कह सकते हैं कि हम सभी बुराइयों से मुक्त एक आदर्श लोकतत्रं हैं? संभवतः नहीं। दरअसल, कोई भी प्रणाली, चाहे वह चुनाव आधृत हो या अन्य, कभी भी किसी क्षेत्र में पूर्णता का दावा नहीं कर सकती। हमारी निर्वाचन प्रणाली भी कुछ ऐसी ही है। |
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