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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक... |
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अग्र लेख
जीवन, संपति और संरचनाओं का सरंक्षण
राष्टिय आपदा प्रबंधन प्रधिकरण (एनङीएमए) के उपाध्यक्ष के साथ योजना की बातचीत के अंश
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मुद्रास्फीति : पुनर्विचार मांगता प्रश्न कमल नयन काबरा |
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अन्य सभी क्षेत्रों की तरह ही अर्थ...
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नितियों को मुद्रास्फीति की चुनौती शशांक भिङे |
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मुद्रास्फीति की ऊंची दर उपभोक्ताओं...
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भारत में मुद्रास्फीति के प्रकरण मानस भट्टाचार्य |
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भारत में परंपरा से मुद्रास्फीति ...
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मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था की स्थिति के.आर.सुदामन |
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मुद्रास्फीति ऐसी स्थिति है जिससे...
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मुद्रास्फीति : मिथक, वास्तविकता एवं नीतिगत एजेंडा
वी. षण्णमुखम देबज्योति डे |
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भारत में तेज़ी से बढ़ रही महंगाई, वैसे ...
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मीडिया और चुनाव |
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सूचना क्रांति के दौर में मीडिया अब पहले से ज्यादा ताक़तवर हो गया है। इसका प्रभाव क्षेत्र भी बढ़ गया है और साक्षरता बढ़ने के कारण यह अब अधिक लोगों तक पहुँचने लगा है। क्षेत्रीय चैनलों और समाचारपत्रों के विस्तार और विकास के कारण भी मीडिया की पहुँच पहले से अधिक बढ़ी है। इस कारण वह जनमत निमार्ण प्रक्रिया में अपनी अधिक भूमिका निभाने लगा है। मीडिया के इस बढ़ते प्रभाव और ताक़त के कारण ही राजनीतिक दल इसके इस्तेमाल में अधिक रुचि लेने लगे हैं। वह जनमत को अपने बस में करने तथा जनमानस को काबू में करने के लिये इसका अधिकाधिक उपयोग करने लगे हैं। इलेक्ट्रानिक चैनलों की बाढ़ से राजनीतिज्ञों को अपनी बात कहने का अधिक मौका मिलने लगा है। |
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