अंक: October 2014
 
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DETAIL STORY
 
 
पृष्ठ कथा
पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक...
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अग्र लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान
जी. श्रीनिवासन .........

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Articles
  अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
  भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
  किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
  कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
  योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
  योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
  योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
  योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
  आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
लोकतांत्रिक आदर्श और भारतीय अनुभव

लोकतांत्रिक भारत में वर्ष 1952 में चुनावी अभियानों का सिलसिला शुरू हुआ था। और उस पहले अध्याय के बाद से ही भारत की चुनाव प्रचार प्रक्रिया औपचारिक प्रचार और अनौपचारिक सामाजिक नेटवर्किंग का एक रचनात्मक संगम रही है। चूंकि सामाजिक नेटवर्किंग विशिष्ट भारतीय सरजमीं पर होती है, चुनाव प्रचार की औपचारिक विधि और उसके लहजे का उस बात से भिन्न होना स्वाभाविक है, जिसे लोकतांत्रिक चुनाव प्रचार के आदर्श के रूप में जाना जाता है। चुनाव प्रचार के भारतीय अनुभव की कहानी उन लोकतांत्रिक आदर्शों से कोसों दूर है जो लोकतंत्र के सिद्धातंकारों ने हमें सौपी थी।
पहले आम चुनाव के चुनाव प्रचार के तरीक़े और आज जिस तरह से प्रचार किया जाता है, उनके बीच का अंतर स्पष्ट करने के लिये बेहतर होगा कि उस गैर कांग्रेस उम्मीदवार की सत्यकथा सुनाई जाए, जिसने पचास के दशक के प्रारंभ में संसद का चुनाव लड़ा था। उस उम्मीदवार की विशेषताएं, उसके निर्वाचन क्षेत्र और राजनीतिक आदर्शवाद का यहां उल्लेख करना समीचीन होगा। अर्द्ध-शहरी पृष्ठभूमि वाले इस उम्मीदवार ने अपनी पूरी जवानी उपनिवेश विरोधी आंदोलन में खपा दी थी, जिसके दौरान भीड़ में भाषण देने की शानदार कला और लोगों से संपर्क बनाने के और अन्य तरीक़े उसने विकसित कर लिये थे। उसे कुछ-कुछ संगठनात्मक कार्यों की भी जानकारी थी।

 
 
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