अंक: October 2014
 
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DETAIL STORY
 
 
पृष्ठ कथा
पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक...
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अग्र लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान
जी. श्रीनिवासन .........

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Articles
  अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
  भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
  किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
  कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
  योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
  योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
  योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
  योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
  आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
बाल अधिकार - सही परिप्रेक्ष्य

बाल अधिकारों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के समझौते में बच्चों के नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अधिकारों को परिभाषित किया गया है बाल अधिकार 18 साल से नीचे के सभी मानव जाति के मौलिक अधिकार तथा उनमें निहित अधिकार हैं भारत ने 11 सितबंर, 1992 को इस समझौते की पुष्टि कर दी थी। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को इस समझौते पर तालमेल बनाने तथा अमल की निगरानी करने के लिये केन्द्रीय एजेंसी के रूप में जिम्मेवारी सौंपी गई है हालाँकि कई देशों ने बाल अधिकार कानून पास कर दिए हैं संभार तंत्र तथा बुनियादी ढांचा, आपसी द्वंद्व एवं युद्ध सहित भू-राजनीतिक माहौल तथा नौकरशाही की अड़ंगेबाजी इस पर अमल में बाधक रही है जिससे दुनियाभर में बाल अधिकारों  के उल्लंघन का शमन करने की व्यवस्था में  सुधार करने की अभी काफी गंजाइश बनी हुई है शैक्षणिक सुअवसर तथा नागरिक अधिकार संबन्धी संवैधानिक गारंटी के बावजूद व्यापक स्तर पर लाखों बच्चे अपने इन अधिकारों से वंचित हैं उनके साथ भेदभाव किया जाता है तथा उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया
जाता है।

 
 
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जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का  घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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