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| पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक... |
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अग्र लेख
भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान जी. श्रीनिवासन
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अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
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भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
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किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
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कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
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योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
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योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
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योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
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योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
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आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
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वन अधिकार कानून, २००६ एक सिंहावलोकन |
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 संसद ने १८ दिसंबर, २००६ को सर्वसम्मति से अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) काननू , २००६ पारित किया था। यह मात्र एक अन्य कानूनभर नहीं है। इसके पारित होने के समय से तथा बाद के वर्षों में यह कहकर इसकी आलोचना की जाती रही है कि यह वनों के निजीकरण का प्रयास है इससे बाकी बचे बाघों का विनाश हो जाएगा और वोट बैंक बनाने के मकसद वाले राजनीतिज्ञों द्वारा यह कल्याणकारी उपाय किया गया है। एक लेखक ने तो १९४७ से अब तक की अवधि में पारित कानूनों में इसे अति खतरनाक कानून बताया था। ३१ दिसंबर, २००७ को इसे लागू करने की अधिसूचना जारी होने के बाद समाचारपत्रों ने इसे भारत के हाल के इतिहास का एक अति विवादास्पद कानून बताया था जबकि पारित होने के एक साल बाद इसे अधिसूचित किया गया। परन्तु वास्तव में यह काननू न तो किसी को भूमि प्रदान करता है और न भूमि का अधिकार यह वनों का निजीकरण भी नहीं करेगा और निश्चित रूप से इसके परिणामस्वरूप भारत के बाघों का विलोप भी नहीं होगा। |
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लेख |
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झरोखा जम्मू कश्मीर का : कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन |
जम्मू-कश्मीर विविधताओं और बहुलताओं का घर है| फुर्सत के पल गुजारने के अनेक तरकीबें यहाँ हर आयु वर्ग के लोगों के लिए बेशुमार है| इसलिए अगर आप ऐडवेंचर टूरिस्म या स्पोर्ट अथवा रोमांचकारी पर्यटन में रूचि रखते हैं तो जम्मू-कश्मीर के हर इलाके में आपके लिए कुछ न कुछ है.
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