अंक: October 2014
 
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DETAIL STORY
 
 
पृष्ठ कथा
पिछले कुछ दशकों में भारत एक के बाद एक आई आपदाओं से इस कदर आहत और क्षत-विक्षत हुआ है कि उसे संभलने का अवसर ही नहीं मिल सक...
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अग्र लेख

भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान
जी. श्रीनिवासन .........

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Articles
  अधिकतम शासनः ई-शासन के माध्यम से जनपहुंच
रंजीत मेहता
  भारत में ई-गवर्नेंस की शुरुआत रक्षा सेवाओं, आर्थिक नियोजन, राष्ट्रीय जनगणना, चुनाव, कर संग्रह, आदि के लिए कम्प्यूटरीकरण पर जोर के साथ 1960 के दशक के अंत में
  किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
  कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का विशालतम क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने वर्ष 2014-15 में समग्र सकल मूल्य वर्धन में
  योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
  योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
  योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
  योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
  आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
पाठ और कुपाठ के बीच वंदेमातरम्‌

बाग्ला के महान लेखक बंकिमचंद्र चटर्जी की रचना वंदेमातरम्‌ हमारे साहित्य की संभवतः पहली ऐसी रचना है जिसे जितनी लोकप्रियता मिली उतना ही विवाद का भी सामना करना पड़ा। १८८१ में आनंदमठ में प्रकाशित (वैसे यह रचना १८७५ के आसपास लिखी गई थी) होने से लेकर क़रीब १२७ वर्ष
बाद भी यह रचना सांप्रदायिक राजनीति के जाल में फंसी है और इसको लेकर जब -  जब विवाद होते रहें हैं पिछले दिनों एक वरिष्ठ नेता ने मुस्लिम महिलाओं के सम्मेलन में वंदेमातरम्‌ को गवाकर यह सिद्ध करने की कोशिश की कि भारत का मुसलमान वर्ग इस रचना को सांप्रदायिक दृष्टि से नहीं देखता। अगर ऐसा है तो यह बहुत अच्छी बात है लेकिन इस रचना के द्वारा कोई राजनीतिक हित नहीं सिद्ध किया जाना चाहिए। कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश में स्कूलों में 'वंदेमातरम' के गाने को लेकर विवाद छिड़ा था और अंततः राज्य सरकार को यह निर्णय वापस लेना पड़ा था।

 
 
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