अंक: November 2008
  बाल अधिकार और भारत
   बाल अधिकार अभिसमय क्या है?
प्रायः सीआरसी अथवा यूएनसीआरसी के

  बच्चों में निवेश की जरूरत
  भारत में दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में निर्धारित न्यूनत
  हिंसक होता बचपन
  देश एवं समाज का भविष्य बहुत कुछ देश के बच्चों के समुचित सरंक्
  बाल अधिकार - सही परिप्रेक्ष्य
  बाल अधिकारों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के समझौते में बच्चो
  बाल विकास एवं पोषण
  वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी का 35 प्रतिशत हिस्स
संपादकीय
 
 
बाल अधिकार  

भारत की कुल जनसंख्या का 42 प्रतिशत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का है एक हालिया सर्वेक्ष्रण में कहा गया है कि वर्ष 2000 और 2005 के बीच केंद्र सरकार द्वारा व्यय किए गए प्रत्येक 100 रुपये में से ओसतन तीन पैसे बच्चों की सुरक्षा पर खर्च किए गए जबकि बाल स्वास्थ्य के हिस्से में  40 पैसे गए। उसके बाद बाल विकास पर 45 पैसे और प्रारंभिक शिक्षा पर एक रुपये पचास पैसे खर्च हुए। ध्यान देने की बात है कि भारत में बच्चों के विकास में ह्रास का जो सिलसिला बना हुआ है वह पिछले डेढ़ दशक में विकास प्रक्रिया की विफलता का एक प्रमुख दष्टातं है अतः विषमताएं मिटाने अतंर को समाप्त करने और देशवास ...

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सार्वभौम शिक्षा की दिशा में उठे कदम

इकहत्तर वर्ष पूर्व, 1937 में 67 वर्ष की आयु में गांधीजी ने सार्वभौमिक शिक्षा के पक्ष में अपनी आवाज उठाई थी। उनकी मागं के उत्तर में कहा गया कि इस पर आने वाले व्यय को वहन करना कठिन होगा। यह उत्तर उतना ही अविश्वसनीय तब भी था, जितना आज है। लेकिन गांधीजी ने अपनी बात को वहीं नहीं छोड़ी उन्हानें कमाई के साथ-साथ पदाई जारी रखने की पद्धति की रूपरेखा भी तैयार की, जो उनकी नयी तालीम की कार्ययोजना थी। स्वाधीनता आंदोलन के एक अन्य महापुरुष बाबा साहब आंबेडकर की भी राय थी कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास भी आवश्यक है। भारत का संविधान अंगीकार होने के पूर्व उन्होंने कहा, राजनीतिक तौर पर हम एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य के सिद्धांत को स्वीकार करने जा रहे हैं परन्तु सामाजिक और राजनीतिक जीवन में अपने आर्थिक ढांचें के तर्क से हम एक व्यक्ति, एक मूल्य के सिद्धातं को नकारना जारी रखगें । हम कब तक
इन विरोधाभासों भरा जीवन जीते रहगें ?

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Last updated: Friday, October 03, 2008