अंक: October 2014
 
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भारत निर्माता के प्रति
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अग्र लेख

परिवहन क्षेत्रः आर्थिक पक्ष

जगन्नाथ कश्यप 


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Articles
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रंजीत मेहता
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  किसानों का कल्याणः वर्तमान परिदृश्य
जे पी मिश्र
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  योगः आधुनिक जीवनशैली व अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता
ईश्वर वी बासवरेड्डी
  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इलाज में चिकित्सा के प्राचीन प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने सु
  योग साधकों का मूल्यांकन एवं प्रमाणन
रवि पी सिंह&bsp; मनीष पांडे
  योग संस्थानों के प्रमाणन की योजना उन मूलभूत नियमों में सामंजस्य बिठाने की दिशा में उठाया कदम है,
  योगः स्वस्थ व तनावमुक्त जीवन का संतुलन
ईश्वर एन आचार&bsp; राजीव रस्तोगी
  आज की व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख पाना एक जटिल कार्य हो गया है लेकिन
बचा लें जल, बचा लें जीवन
गिरीश चंद्र पांडे

यों तो जल की उपयोगिता संपूर्ण विश्व के लिए अपरिहार्य है| जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती| अग्नि, पृथ्वि, जल, वायु तथा आकाश इन पंच तत्वों से निर्मित हमारे शरीर में भी 80 प्रतिशत जल मौजूद है| शरीर में जल की कमी अनेक रोगों को आमंत्रण देती है| लेकिन भारत में जल की उपयोगिता मानव जीवन के अलावा कृषि के लिए भी समान रुप से महत्वपूर्ण है| इसलिए यहां पर हम जल की उपयोगिता का आकलन मानव तथा कृषि के परिपेक्ष्य में करेंगे|

जल और जीवन

जल का कोई विकल्प नहीं है, इसकी एक-एक बूंद अमृत है| लेकिन भारत में तेज़ी से घटते जल स्रोतों से मानव के समक्ष पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है| आज भी एक-तिहाई लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है जबकि वर्ष 2010 तक हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का वादा किया गया है|वैश्विक तपन तथा जलवायु परिवर्तन की वजह से तेजी से पिघलते ग्लेशियर भी आने वाले खतरे का संकेत दे रहे हैं| काफ़ी हद तक जल के दुरूपयोग ने भी समस्या को बढाया है| यही नहीं, पेयजल की गुणवत्ता भी यथेष्ठ नहीं है| इसीलिए वर्ष 2010 के जल दिवस का विषय है- पेयजल की गुणवत्ता| एक अनुमान के अनुसार हर दिन दुनिया भर के पानी में 20 लाख टन सीवेज, औधौगिक और कृषि क़चरा डाला जाता है| संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हर साल हम 1,500 घन किमी पानी बर्बाद करते हैं| दुनियाभर में 2.5 अरब लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है| पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण है - जलजनित बीमारियां| युध्द सहित सभी तरह की हिंसाओं से मरने वाले लोगों से कहीं ज्यादा लोग हर साल असुरक्षित पानी पीने से मर जाते हैं| दुनियां में सालना होने वाली कुल मौतों में से 3.1 प्रतिशत मौंतें जल की साफ़ - सफ़ाई न होने से होती है| असुरक्षित पानी से होने वाली बीमारी डायरिया से हर साल चार अरब मामलों में 22 लाख मौतें होती हैं| भारत में बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण यही बीमारी है| हर साल क़रिब पांच लाख बच्चे इसका शिकार बनते हैं| भूजल पर आश्रित दुनिया में 24 प्रतिशत स्तनधारियों और 12 फ़ीसदी पक्षी प्रजातियों के विलुप्त हो जाने का खतरा है, जबकि एक-तिहाई उभयचरों पर भी तलवार लटकी है|

 
 
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